बीआर शेट्टी और बैंक ऑफ़ बड़ौदा का कानूनी विवाद
एनएमसी हेल्थकेयर ग्रुप और यूएई एक्सचेंज के फाउंडर बीआर शेट्टी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक नया कानूनी कदम उठाया है। उन्होंने बैंक ऑफ़ बड़ौदा पर गंभीर आरोप लगाते हुए 15 अरब डॉलर के भारी मुआवजे की मांग की है।
फर्जी हस्ताक्षर और लोन के आरोप
याचिका के अनुसार, बीआर शेट्टी का दावा है कि इस सरकारी बैंक और उसके कुछ अधिकारियों ने उनकी कंपनियों से जुड़े धोखाधड़ी मामलों में सक्रिय रूप से सहायता की। आरोप है कि उनके फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर ऋण और क्रेडिट सुविधाएं जारी की गईं, जबकि उन्होंने उन दस्तावेजों पर कभी हस्ताक्षर किए ही नहीं थे।
फंड हेराफेरी और शेल कंपनियां
जांच और अदालत में दी गई जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2019 के आसपास तक बैंक एनएमसी हेल्थकेयर ग्रुप का मुख्य बैंकर था। आरोप है कि बैंक ने केवल लेनदेन संसाधित करने के बजाय फंड हेराफेरी के लिए एक व्यवस्थित तंत्र के रूप में काम किया। इसके जरिए पैसा अवैध रूप से निकालकर पूर्व सीईओ प्रशांत मंगात, उनके भाई प्रमोट मंगात और उनके द्वारा नियंत्रित शेल कंपनियों तक पहुंचाया गया।
बिना अनुमति के फर्जी खाते खोलना
शिकायत में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2017 से 2019 के बीच शेट्टी की जानकारी के बिना नेशनल बैंक ऑफ फुजैराह में दो फर्जी खाते खोले गए। इन खातों का उपयोग कंपनी से धन निकालने के लिए किया गया था। इसके साथ ही, बैंक पर आरोपियों को यह सिखाने का भी आरोप है कि ऑन पेपर इन फर्जी लेनदेनों को कैसे सही और व्यवस्थित दिखाया जाए।
लुकआउट सर्कुलर और मानहानि का दावा
साल 2020 में वित्तीय संकट और धोखाधड़ी उजागर होने के बाद, शेट्टी का आरोप है कि बैंक ने अपनी जवाबदेही छिपाने के लिए सरकारी एजेंसियों के माध्यम से उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी करवा दिया। इससे उनकी वैश्विक प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा, जिसके एवज में उन्होंने कुल मुआवजे का एक बड़ा हिस्सा यानी 5 अरब डॉलर केवल मानहानि और सद्भावना के नुकसान के रूप में मांगा है।
Sources: ABP News, News18 Hindi, Hindustan.




