ब्राज़ील की संसद का बड़ा फैसला
ब्राज़ील की संसद ने एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन को पास कर दिया है जिसके तहत काम के हफ़्ते को 44 घंटों से घटाकर 40 घंटे किया जाएगा। इस नए बदलाव से देश के कामगारों को बिना किसी वेतन कटौती के प्रति सप्ताह दो दिन का अवकाश प्राप्त होगा।
यह निर्णय देश में 1988 में लोकतंत्र की बहाली के बाद से श्रमिक अधिकारों में किया गया सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सीनेट ने वामपंथी राष्ट्रपति लुई इनैसियो लूला डा सिल्वा के इस समर्थित प्रस्ताव को भारी बहुमत से स्वीकृति दी, जिसमें 75 वोट पक्ष में और एक वोट विपक्ष में पड़ा।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और प्रभाव
राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा के समर्थकों और अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से राष्ट्रपति को आगामी राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में अपने प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ लाभ मिल सकता है। शुरुआती दौर में लूला के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले सीनेटर फ़्लावियो बोल्sonaro ने भी जनता के भारी समर्थन को देखते हुए अपना रुख बदला और इसके पक्ष में मतदान किया।
जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक, लगभग 70 प्रतिशत ब्राज़ीलियाई नागरिकों ने कार्य सप्ताह को छोटा करने के इस विचार का समर्थन किया है। हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि इससे उत्पादन लागत बढ़ सकती है जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं पर कीमतों में वृद्धि के रूप में पड़ेगा। दूसरी ओर, समर्थकों का कहना है कि पर्याप्त आराम मिलने से कर्मचारियों की कार्य उत्पादकता में सुधार होगा।
कार्यान्वयन की प्रक्रिया
यह नया बदलाव पूरी तरह से लागू होने में एक साल से अधिक का समय लेगा और इसे चरणबद्ध तरीके से अमल में लाया जाएगा। शुरुआत में दो महीने की अनुग्रह अवधि के बाद कार्य सप्ताह को 42 घंटे किया जाएगा और उसके बाद इसे घटाकर 40 घंटे के अंतिम लक्ष्य तक पहुंचाया जाएगा।
Sources: BBC, Reuters, Courthouse News.




