Sunday, 18 October 2026

गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी पर किसानों की आय का गणित

रबी विपणन सीजन के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ा दिया गया है, लेकिन क्या यह मामूली इजाफा किसानों के बढ़ते खर्च को पूरा कर पाएगा?

गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी पर किसानों की आय का गणित

रबी विपणन सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में बदलाव

सरकार ने आगामी रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल तय कर दिया है। इससे पहले यह निर्धारित भाव 2,585 रुपये प्रति क्विंटल था, जिसका मतलब है कि सरकारी खरीद केंद्रों पर अब किसानों को प्रति क्विंटल पर 25 रुपये की अतिरिक्त राशि मिल सकेगी।

खेती के बढ़ते खर्च और अतिरिक्त कमाई का हिसाब

खेती की प्रक्रिया में बीज, खाद, डीजल, सिंचाई और मजदूरी पर निरंतर धन खर्च होता है, जिससे कुल लागत बढ़ जाती है। ऐसे में यह सवाल अहम हो जाता है कि 25 रुपये प्रति क्विंटल की इस बढ़ोतरी से किसानों की जेब में असल में कितनी रकम आएगी। यदि कोई उत्पादक 10 क्विंटल गेहूं बेचता है, तो उसे 250 रुपये का लाभ मिल सकता है, जबकि 50 क्विंटल पर 1,250 रुपये और 100 क्विंटल पर 2,500 रुपये तक अधिक मिल सकते हैं। हालांकि, यह लाभ पूरी तरह से उपज की मात्रा और इस बात पर निर्भर करता है कि फसल नए एमएसपी पर बिके, क्योंकि खुले बाजार में मिलने वाले दाम अलग हो सकते हैं।

उत्पादन लागत और किसानों के तर्क

सरकार की ओर से यह बताया गया है कि गेहूं के एमएसपी पर उत्पादन लागत की तुलना में 106 प्रतिशत का मुनाफा दिया जा रहा है। इसके विपरीत, विभिन्न किसान संगठनों ने लागत की गणना करने के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि फसल तैयार करने के दौरान खेत के किराए और परिवार के सदस्यों की मेहनत जैसे पहलुओं को भी कुल खर्च में शामिल किया जाना चाहिए।

किसान के लिए इसका वास्तविक अर्थ

एमएसपी में बढ़ोतरी होने से सरकारी खरीद के लिए एक निश्चित आधार जरूर मिलता है, लेकिन किसानों की वास्तविक आय प्रति एकड़ कुल पैदावार, उत्पादन लागत और बाजार में मिलने वाले विक्रय मूल्य पर निर्भर करती है। इसलिए केवल एमएसपी बढ़ने को ही कुल मुनाफे का संकेत मानने के बजाय, किसानों को अपनी खेती के सभी खर्चों और बिक्री का पूरा हिसाब किताब साथ में देखना चाहिए।

Sources: ABP News, Dainik Bhaskar, Edristi.

Written by

Akhil Pandey

Akhil Pandey is a Senior Editor responsible for reviewing, refining, and improving editorial content to ensure clarity, accuracy, and readability. His editorial approach focuses…