दुर्लभ स्लो लोरिस इंडोनेशिया के बांग्का द्वीप पर फिर आया नजर
इंडोनेशिया के बांग्का द्वीप पर करीब 90 साल से लापता माने जा रहे दुर्लभ स्लो लोरिस के जिंदा होने की पुष्टि हुई है, हालांकि प्रजाति के सामने अब भी कई खतरे हैं।

इंडोनेशिया में मिला दुर्लभ स्लो लोरिस
इंडोनेशिया के बांग्का द्वीप पर लगभग 90 साल से लापता माने जा रहे स्लो लोरिस के जिंदा होने का पता चला है। वैज्ञानिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस जीव का आखिरी बार पता 1930 से 1932 के बीच चला था और साल 2020 में इसे अत्यधिक विलुप्त होने के खतरे वाली सूची में रखा गया था।
शारीरिक बनावट और विशेषताएं
वैज्ञानिक रूप से इसे निक्टिसबस बैंकानस कहा जाता है। यह एक छोटा जानवर है जिसके शरीर पर लाल-भूरे रंग के बाल, बड़ी आंखें और चेहरे पर खास निशान होते हैं। यह पेड़ों पर रहता है और रात के समय खाने की तलाश करता है। पेड़ों पर इसकी गति बेहद धीमी होती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका संबंध मेडागास्कर के लीमर और अफ्रीका के गैलगो से अधिक करीब है।
काटने से होने वाला खतरा
इस प्राणी की सबसे विशिष्ट बात इसकी रक्षा करने की जहरीली प्रणाली है। इसकी कोहनी के पास विशेष ग्रंथियां होती हैं जो तरल पैदा करती हैं। यह जानवर अपने हाथों को मुंह तक लाकर इस तरल को अपनी लार में मिला लेता है, जिससे काटने पर जहर शरीर में प्रवेश कर जाता है। इसके काटने से इंसानों को गंभीर एलर्जी हो सकती है जो कुछ मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकती है।
हालिया रेस्क्यू और सर्वे की स्थिति
अलोबी वाइल्डलाइफ रेस्क्यू सेंटर ने जानकारी दी है कि 2015 से 2025 के बीच द्वीप के विभिन्न हिस्सों से 90 से अधिक बांग्का स्लो लोरिस दर्ज किए गए हैं। इनमें से कई बगीचों, घरों और सड़कों के पास मिले थे, और कुछ बिजली के तारों से टकराकर घायल हो गए थे। इलाज के बाद इनमें से 86 जानवरों को सुरक्षित रूप से जंगल में वापस छोड़ दिया गया। हालांकि, वर्तमान में इनकी कुल संख्या को लेकर कोई निश्चित आंकड़ा नहीं है।
अस्तित्व के सामने चुनौतियां
इस दुर्लभ प्राइमेट के सामने सबसे बड़ा संकट जंगलों का लगातार कम होना है। द्वीप पर टिन खनन और पाम ऑयल के बागान विकसित करने के लिए जंगलों को काटा जा रहा है, जिससे इनके प्राकृतिक आवास और भोजन की जगह सिमटती जा रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रजाति को बचाने के लिए बचे हुए जंगलों का संरक्षण करना और व्यापक सर्वे करना अनिवार्य है।
Sources: AajTak, NewsBytes, https://hindi.theopenpress.in/.



