महुआ मोइत्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट के वकीलों को पुरानी गाड़ियों की छूट पर उठाए सवाल
दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा वकीलों और अदालत के कर्मचारियों को बीएस-6 नियमों से छूट दिए जाने के फैसले पर सांसद महुआ मोइत्रा और सौरभ दास ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है।

महुआ मोइत्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर जताई आपत्ति
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय के एक फैसले को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। अदालत ने अपने एक आदेश में वकीलों और अदालत के कर्मचारियों को शहर में प्रदूषण के मद्देनजर लागू बीएस-6 पूर्व के वाहनों के प्रतिबंध से राहत देने की घोषणा की है, जिस पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के पीछे की पृष्ठभूमि
प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने 23 जून को निर्णय लिया था कि बीएस-6 उत्सर्जन मानकों के अनुरूप न होने वाले और दिल्ली के बाहर पंजीकृत वाहनों के प्रवेश पर 1 नवंबर से 31 जनवरी तक रोक रहेगी। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने अदालत में याचिका दायर कर एनसीआर के विभिन्न इलाकों जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद से न्यायिक कार्यों के लिए आने वाले वकीलों के वाहनों को इस प्रतिबंध से बाहर रखने की मांग की थी।
याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अमित महाजन ने आदेश दिया कि अदालत के कामकाजी दिनों के दौरान वकीलों और कोर्ट स्टाफ के वाहनों को इस पाबंदी से छूट प्राप्त होगी।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस और प्रतिक्रियाएं
इस फैसले के सामने आने के बाद महुआ मोइत्रा ने इस खबर का स्क्रीनशॉट अपने एक्स (X) हैंडल पर साझा करते हुए लिखा कि यह कानूनी कैसे हो सकता है और क्या अदालत अपना आपा खो चुकी है। उनके अलावा कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने भी इस पर सवाल खड़े करते हुए टिप्पणी की कि कानून के सामने समानता अब समाप्त हो चुकी है। इन पोस्ट्स के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो अलग-अलग गुटों में बंट गए, जहां कुछ लोगों ने न्यायपालिका के रुख की आलोचना की तो कुछ ने इन बयानों पर आपत्ति जताई।
Sources: Hindustan, AajTak, News18 Hindi.



