सौर ऊर्जा से 455 कृषि पंपों को शक्ति: औरंगाबाद के किसान श्यामजी की 1 MW योजना
औरंगाबाद के घटराइन गाँव में पीएम‑कुसुम योजना के तहत 1 MW सौर ऊर्जा संयंत्र का सफलतापूर्वक कमीशनिंग हुआ, जिससे 455 कृषि पंपों को बिजली मिलेगी।

सौर ऊर्जा से 455 कृषि पंपों को शक्ति
औरंगाबाद के घटराइन गांव में प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान (पीएम‑कुसुम) योजना के तहत एक मेगावाट क्षमता वाला सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया है। इस परियोजना की सफल कमीशनिंग के बाद अगले दो दिनों में बिजली उत्पादन शुरू होने की संभावना है।
औरंगाबाद के किसान श्यामजी की शानदार पहल: 1 MW सोलर प्लांट से 50 लाख की कमाई
स्थापना का कार्य स्थानीय किसान श्यामजी ने किया। उन्होंने विद्युत वितरण कंपनी (डिस्कॉम) के साथ प्रति यूनिट 3.40 रुपये की दर से विद्युत् खरीद समझौता (PPA) किया है, जिससे संयंत्र संचालक को सालाना लगभग पचास लाख रुपये का राजस्व मिल सकता है। यह जिला का निजी क्षेत्र में पहला सौर ऊर्जा संयंत्र है।
औरंगाबाद में सोलर स्टेशन तैयार, बिजली आपूर्ति में सुधार
सौर ऊर्जा से उत्पन्न बिजली पावर सब‑स्टेशन तक पहुँचाई जाएगी और वहाँ से ग्रिड में आपूर्ति होगी, जैसा कि विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता पंकज कुमार गुप्ता ने बताया। इस कदम से स्थानीय कृषि कार्यों में बिजली की उपलब्धता सुधरेगी और सिंचाई के लिए निरंतर ऊर्जा स्रोत सुनिश्चित होगा।
परियोजना के आर्थिक एवं सामाजिक प्रभाव
एक मेगावाट संयंत्र की कुल लागत लगभग पाँच करोड़ रुपये आती है, जिसमें सरकार डेढ़ करोड़ रुपये का अनुदान देती है। इस निवेश से न केवल किसानों को सस्ती बिजली मिलेगी, बल्कि परम्परागत ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता भी घटेगी। बिहार में अब तक पीएम‑कुसुम योजना के तहत 17 ऐसे सौर संयंत्र स्थापित हो चुके हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 45.68 MW है।
आगे का रास्ता
संयंत्र से मिलने वाली बिजली के माध्यम से 455 कृषि पम्पों को निरंतर ऊर्जा उपलब्ध होगी, जिससे फसल‑सिंचाई में सुधार की उम्मीद है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो समान आकार के सौर परियोजनाओं को अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में दोहराने की संभावना बढ़ेगी।
Sources: Jagran, Prabhat Khabar, Navbharat Live.



