सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की हवाई यात्रा की याचिका पर दिया सख्त बयान
सुप्रीम कोर्ट ने हवाई टिकटों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख और हवाई यात्रा याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने हवाई टिकटों की कीमतों में अत्यधिक बढ़ोतरी के खिलाफ दायर एक याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील की दलीलों पर तीखी टिप्पणी करते हुए मामला खारिज कर दिया।
पीठ के समक्ष एक अधिवक्ता ने मामले का तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किया था। सुनवाई के दौरान वकील ने अदालत के सामने तर्क रखा कि हवाई यात्रा एक आवश्यक सेवा है और टिकट की दरों में 700 प्रतिशत तक की बेतहाशा बढ़ोतरी संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई वाली पीठ ने संक्षिप्त और सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हवाई यात्रा न करें और इसके बाद अगले मामले की सुनवाई शुरू कर दी।
नियामक और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं
शीर्ष अदालत सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की ओर से दायर एक अलग याचिका पर पहले से सुनवाई कर रही है। इस याचिका में नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता एवं यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत व स्वतंत्र नियामक बनाने की मांग की गई है। साथ ही, निजी विमानन कंपनियों द्वारा हवाई किरायों और सहायक शुल्कों में अनिश्चित उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए नियामकीय दिशानिर्देश बनाने की मांग भी की गई है।
इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को सूचित किया था कि विमानन क्षेत्र को विनियमित करने के उद्देश्य से बनाए गए 2024 के कानून के तहत नियमों को प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है।
नए दिशानिर्देश और आगामी नियम
अदालत में चल रहे घटनाक्रम के बीच केंद्र सरकार ने हवाई किराए को लेकर नए दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। 'भारतीय वायुयान नियम, 2026' के तहत अधिसूचित ये नियम आगामी 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। नए नियमों के अनुसार सरकार अपनी मौजूदा नीति को जारी रखेगी, जिसके तहत किराए का निर्धारण बाजार की मांग और आपूर्ति पर निर्भर करेगा।
सरकार की फिलहाल एयरलाइंस के किराए पर कोई सामान्य सीमा या सीधा नियंत्रण लगाने की योजना नहीं है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई असाधारण स्थिति पैदा होती है और जनहित में ऐसा करना बेहद आवश्यक होता है, तभी सरकार हस्तक्षेप करेगी। इसके अलावा, पीक सीजन या आपात स्थितियों में यात्रियों से मनमाने पैसे न वसूले जाएं, इसके लिए एयरलाइनों पर एक मजबूत निगरानी ढांचा बनाए रखने की बात भी कही गई है।
Sources: Jagran, Navbharat Live, Hindustan.



