Saturday, 7 November 2026

सुप्रीम कोर्ट ने OBC क्रीमी लेयर और पुरानी भर्तियों पर स्पष्ट किया रुख

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल माता-पिता के वेतन से नहीं होगा, जबकि पुरानी भर्तियां सुरक्षित रहेंगी।

सुप्रीम कोर्ट ने OBC क्रीमी लेयर और पुरानी भर्तियों पर स्पष्ट किया रुख

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: केवल वेतन से तय नहीं होगी क्रीमी लेयर की स्थिति

देश की सर्वोच्च अदालत ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण के दायरे को लेकर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। न्यायालय ने साफ किया है कि किसी उम्मीदवार के लिए क्रीमी लेयर की स्थिति का निर्धारण केवल उसके माता-पिता की वेतन आय के आधार पर नहीं किया जा सकता है। इसके लिए उनके सरकारी पद की श्रेणी और सामाजिक स्थिति पर भी विचार करना जरूरी होगा। यह स्पष्टीकरण जस्टिस पामिदिघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ द्वारा केंद्र सरकार के विविध आवेदन पर सुनवाई के दौरान दिया गया।

पुरानी भर्तियां, नियुक्तियां और प्रमोशन रहेंगे सुरक्षित

केंद्र सरकार ने अदालत के समक्ष चिंता व्यक्त की थी कि इस फैसले को पिछली तारीख से लागू करने पर पूर्व में पूरी हो चुकी चयन प्रक्रियाओं और शैक्षणिक दाखिलों पर असर पड़ सकता है। सरकार के अनुसार, वर्ष 2016 से 2025 के बीच लाखों आरक्षित पदों को भरा गया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए स्पष्ट किया कि यह फैसला स्वतः ही पहले पूरी हो चुकी चयन प्रक्रियाओं, नियुक्तियों और वरिष्ठता को दोबारा खोलने का आधार नहीं बनेगा। जिन मामलों में वरिष्ठता और पदोन्नति पहले ही तय हो चुकी है, उन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, जिन लोगों के दावे पहले से किसी न्यायालय या न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित हैं, वहां गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जा सकेगा।

सिविल सेवा परीक्षा 2025 और सेवा आवंटन के निर्देश

इस कानूनी स्थिति का असर आगामी प्रक्रियाओं पर भी पड़ेगा। केंद्र सरकार ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2025 के 958 अनुशंसित उम्मीदवारों के सेवा आवंटन को लेकर स्पष्टता मांगी थी। अदालत ने कहा कि चूंकि परीक्षा का परिणाम घोषित हो चुका है, इसलिए सेवाओं के आवंटन में 11 मार्च के फैसले में निर्धारित सिद्धांतों और व्याख्या को ही लागू किया जाएगा।

नीतिगत स्वतंत्रता और पृष्ठभूमि

यह पूरा विवाद 8 अगस्त 1993 के मूल कार्यालय ज्ञापन और 14 अक्टूबर 2004 के उस स्पष्टीकरण से जुड़ा है जिसमें विभिन्न संस्थानों के कर्मचारियों के बच्चों के वेतन को लेकर प्रावधान किए गए थे। अदालत ने अपने पहले के फैसले में माना था कि 2004 का स्पष्टीकरण मूल नीति में कोई अतिरिक्त शर्त नहीं जोड़ सकता। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार संविधान और निर्धारित कानूनी सिद्धांतों के दायरे में रहकर अपनी नीति बनाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।

Sources: Navbharat Live, Jagran, Dainik Bhaskar.

Frequently asked questions

क्रीमी लेयर तय करने का नया आधार क्या है?
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, केवल माता-पिता की वेतन आय को आधार नहीं बनाया जा सकता, बल्कि उनके पद की श्रेणी और स्थिति पर भी विचार करना होगा।
क्या इस फैसले से पुरानी भर्तियां और प्रमोशन प्रभावित होंगे?
अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले के आधार पर पहले से पूरी हो चुकी चयन प्रक्रियाओं, नियुक्तियों और वरिष्ठता को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
सिविल सेवा परीक्षा 2025 (CSE-2025) के लिए क्या निर्देश हैं?
CSE-2025 के चयनित OBC उम्मीदवारों के सेवा आवंटन में क्रीमी लेयर से संबंधित वही सिद्धांत लागू होंगे जिनकी व्याख्या 11 मार्च के फैसले में की गई थी।
किस पीठ ने यह स्पष्टीकरण जारी किया?
यह स्पष्टीकरण जस्टिस पामिदिघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र सरकार के आवेदन पर सुनवाई करते हुए दिया।
Written by

Tanya Singh

Tanya Singh is a Junior Bengali Content Writer who specializes in creating engaging, informative, and reader-friendly content in Bengali. She focuses on presenting information in…