अल नीनो के प्रभाव से दिसंबर और सर्दियों में तापमान बढ़ने की आशंका
विश्व मौसम संगठन की चेतावनी के अनुसार अल नीनो के प्रभाव से इस बार सर्दियों का मौसम गर्म रह सकता है, जिससे कृषि और गेहूं की पैदावार पर संकट गहराने की आशंका है।

अल नीनो और बदलते मौसम का असर
दुनिया भर में मौसम के बदलते मिजाज के बीच अल नीनो को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। विश्व मौसम संगठन ने आने वाले समय में इसके और अधिक मजबूत होने की आशंका जताई है, जिसका सीधा असर भारत के मौसम और खेती पर पड़ सकता है।
दिसंबर और सर्दियों के तापमान पर प्रभाव
विश्व मौसम संगठन द्वारा दक्षिण एशिया जलवायु आउटलुक फोरम के अनुमान का हवाला देते हुए बताया गया है कि अक्टूबर से दिसंबर के दौरान दक्षिण एशिया के बड़े हिस्से में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य या उससे अधिक दर्ज किया जा सकता है। इससे इस बार सर्दियों का मौसम अपेक्षाकृत गर्म रहने की संभावना है।
खेती और गेहूं की पैदावार पर संकट
कम बारिश और बढ़ते तापमान का सीधा दबाव कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। बीते मॉनसून सीजन में देश के विभिन्न हिस्सों में असमान बारिश देखने को मिली थी, जहां पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में औसत से 26 फीसदी और दक्षिण भारत में 24 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई थी। यदि आने वाले महीनों में तापमान सामान्य से ज्यादा रहता है, तो जलाशयों में पानी की उपलब्धता और सिंचाई पर दबाव बढ़ेगा। इसके अलावा, सर्दियों के आखिरी चरण में जब गेहूं की फसल में दाने भरने की प्रक्रिया चलती है, तब अत्यधिक गर्मी होने से पैदावार पर गंभीर संकट आ सकता है।
भविष्य की मौसमी स्थितियां
जनवरी और फरवरी के दौरान मौसम का असल रुख अल नीनो के साथ-साथ पश्चिमी विक्षोभ जैसे अन्य मौसमी कारकों पर भी निर्भर करेगा। वैश्विक स्तर पर भी इसके अलग-अलग प्रभाव देखने को मिल रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार ही मौसम का वास्तविक बदलाव तय होगा।



