Tuesday, 3 November 2026

भारतीय रेल का आधुनिकीकरण और यात्रियों के अनुभव की जमीनी हकीकत

भारतीय रेल में नई ट्रेनों और स्टेशनों के रीडेवलपमेंट का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन क्या आम यात्रियों का सफर भी उतना ही बेहतर हुआ है?

भारतीय रेल का आधुनिकीकरण और यात्रियों के अनुभव की जमीनी हकीकत

भारतीय रेल में चल रहा बड़े पैमाने पर बदलाव

भारतीय रेलवे में इन दिनों आधुनिकीकरण के तहत भारी निवेश किया जा रहा है। नई और आधुनिक ट्रेनें पटरियों पर उतारी जा रही हैं और देश भर के स्टेशनों का बड़े पैमाने पर रीडेवलपमेंट किया जा रहा है ताकि बुनियादी ढांचे को सुधारा जा सके।

इन तमाम बदलावों के बावजूद, रोजाना सफर करने वाले करोड़ों आम यात्रियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि क्या उनका दैनिक सफर भी उसी रफ़्तार से बेहतर हुआ है।

अमृत भारत स्टेशन योजना और स्टेशनों का मेकओवर

रेलवे के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में अमृत भारत स्टेशन योजना सबसे प्रमुख है। रेल मंत्रालय के अनुसार, दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत 1337 स्टेशनों की पहचान की गई थी, जिनमें से 155 स्टेशनों पर विकास कार्य पूरा कर लिया गया था। इस योजना के माध्यम से स्टेशन भवनों, वेटिंग हॉल, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, पेयजल, फुट ओवरब्रिज, लिफ्ट, एस्केलेटर और यात्री सूचना प्रणाली को उन्नत बनाया जा रहा है। हालांकि, चलती ट्रेनों और यात्रियों की भारी आवाजाही के बीच निर्माण कार्य को पूरा करना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।

वंदे भारत ट्रेनों से बढ़ी उम्मीदें

वंदे भारत एक्सप्रेस आधुनिक रेल सेवा का मुख्य चेहरा बनकर सामने आई है। इसके आरामदायक डिब्बे और तेज गति के कारण यात्रियों का आकर्षण इसकी तरफ तेजी से बढ़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में 2.97 करोड़ यात्रियों की तुलना में वर्ष 2025-26 में लगभग 3.98 करोड़ लोगों ने वंदे भारत से सफर किया, जो लगभग 34 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। इसके अलावा जनवरी 2026 में शुरू की गई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने अपने शुरुआती तीन महीनों में ही 1.21 लाख यात्रियों को सेवा दी।

कैग रिपोर्ट और बुनियादी सुविधाओं की हकीकत

सरकारी ऑडिट रिपोर्ट और नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की संसद में पेश की गई रिपोर्ट बुनियादी सुविधाओं की जमीनी तस्वीर को दर्शाती है। जांचे गए 512 नॉन-सबअर्बन स्टेशनों में से 458 स्टेशनों पर बुनियादी यात्री सुविधाओं में कमियां पाई गईं, जिनमें मुख्य रूप से शौचालय, यूरिनल और साफ पानी की दिक्कतें शामिल थीं। इसके अलावा, लंबी दूरी की ट्रेनों में साफ-सफाई और पानी की कमी को लेकर भी यात्रियों की तरफ से लगातार शिकायतें दर्ज की गई हैं।

सुरक्षा और समयबद्धता में सुधार के प्रयास

यात्री सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए भी रेलवे द्वारा ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। ट्रेनों की समयबद्धता का स्तर वर्ष 2023-24 के 73.62 प्रतिशत से बढ़कर फरवरी 2026 तक 77.24 प्रतिशत तक पहुंच गया है। रेलवे का मुख्य उद्देश्य केवल नया ढांचा खड़ा करना नहीं, बल्कि हर आम यात्री को साफ-सुथरी और सुरक्षित यात्रा का अनुभव कराना है।

Sources: Jagran, Inshorts, Dainik Bhaskar.

Written by

Tanya Singh

Tanya Singh is a Junior Bengali Content Writer who specializes in creating engaging, informative, and reader-friendly content in Bengali. She focuses on presenting information in…