दिल्ली उच्च न्यायालय में आशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत बढ़ाने की याचिका वापस ली गई
आशुतोष रांका और सौरव दास ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी हिरासत बढ़ाने के विरोध में दायर याचिका को वापस ले लिया, अदालत ने उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने सुनवाई का इंतज़ार करने का सुझाव दिया।

आशुतोष रांका और सौरव दास ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका को वापस ले लिया है। अदालत ने उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) के सामने सुनवाई का इंतज़ार करने का सुझाव दिया।
दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्देश
वकीलों को बताया गया कि यदि उनके मुवक्किलों को एसईएम की सुनवाई के बाद भी हिरासत में रखा गया तो वे सीधे हाई कोर्ट में रिट याचिका के बजाय सेशन कोर्ट में अपील कर सकते हैं। इस सलाह को स्वीकार कर दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली।
हिरासत बढ़ाने के कारण
अदालत ने हिरासत बढ़ाने के दो मुख्य कारण बताए: पहला, पिछले आचरण में कानून के प्रति अनादर और शांति भंग की गंभीर आशंका; दूसरा, प्रस्तुत ज़मानतियों को अस्वीकार्य मानना। इन कारणों के आधार पर एसईएम रितु राज ने 19 अक्टूबर को पहले दो दिन की हिरासत बढ़ाई थी और 19 अक्टूबर को इसे दो और दिन तक बढ़ाया।
पुलिस का दावा और बॉन्ड उल्लंघन
दिल्ली पुलिस का कहना है कि रिहा होने के तुरंत बाद रांका और दास ने फिर से जंतर‑मंतर में प्रदर्शन का आह्वान किया। पुलिस ने बताया कि 13 अक्टूबर को वे जेडीयू कार्यालय के परिसर से कूदकर जंतर‑मंत्र पहुंचे और नारेबाज़ी शुरू की। इस पर एसईएम ने उन्हें बीएनएसएस धारा 130 के तहत नोटिस जारी कर पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।
आगे की प्रक्रिया
यदि अदालत आगे भी हिरासत बढ़ाती है, तो रांका और दास को सेशन कोर्ट में अपील का अधिकार है। वर्तमान में वे एसईएम के अगले सुनवाई का इंतज़ार कर रहे हैं। इस मामले में सीजेपी के लीगल हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पर जल्द सुनवाई की मांग की है।
Sources: BBC, AajTak, Dainik Bhaskar.



