Sunday, 18 October 2026

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पूर्व जज की अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर चुनौती

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक पूर्व जिला न्यायाधीश की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्याय मित्र नियुक्त किया है। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को तय की गई है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पूर्व जज की अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर चुनौती

पूर्व जिला न्यायाधीश द्वारा अनिवार्य सेवानिवृत्ति को चुनौती

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से हटाए गए एक पूर्व न्यायिक अधिकारी की याचिका पर सुनवाई तेज कर दी है। याचिकाकर्ता ने अपनी सेवा के दौरान नियमों में बदलाव किए जाने और गलत तरीके से सेवा समाप्त करने पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

याचिकाकर्ता के आरोप और सेवा का सफर

याचिका दाखिल करने वाले आर.के. श्रीवास ने वर्ष 2000 में न्यायिक सेवा की शुरुआत की थी। अपनी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में हर साल बी और सी ग्रेड पाने के बाद उन्हें वर्ष 2016 में उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नति देकर जिला न्यायाधीश (प्रारंभिक स्तर) बनाया गया था। उच्च न्यायिक सेवा में करीब डेढ़ साल के छोटे कार्यकाल के दौरान उनका चार बार स्थानांतरण हुआ, जिसके बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच बिठाकर उन्हें निलंबित भी किया गया। अंततः मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की फुल बेंच की सिफारिश पर अप्रैल 2018 में उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी।

सेवा नियमों में बदलाव पर उठाए गए सवाल

याचिका में दावा किया गया है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायिक सेवा नियम, 2017 के नियम 14 के उपनियम 2 के मुताबिक, अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए या तो अधिकारी की सेवा के 10 वर्ष पूरे होने चाहिए थे या फिर उसकी आयु 50 वर्ष होनी चाहिए थी। याचिकाकर्ता का यह भी तर्क है कि सिविल जज और मजिस्ट्रेट के रूप में निचली न्यायपालिका में बिताई गई सेवा को उच्च न्यायिक सेवा की अवधि के साथ नहीं जोड़ा जा सकता था।

इसके अलावा, याचिका में आरोप लगाया गया है कि सेवानिवृत्ति दिए जाने से करीब एक महीने पहले यानी मार्च 2018 में वर्ष 1994 के सेवा नियमों में संशोधन किया गया था। इन संशोधनों के जरिए अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए आवश्यक सेवा अवधि को 20 साल से घटाकर 10 साल कर दिया गया था, जबकि आयु सीमा 50 वर्ष ही रखी गई थी। याचिकाकर्ता के अनुसार यह बदलाव उन्हें हटाने के इरादे से ही किया गया था।

हाईकोर्ट की अगली कार्रवाई

मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने कानूनी पहलुओं में मदद के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता हेमंत श्रीवास्तव को न्याय मित्र नियुक्त किया है। इस मामले पर हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आना अभी बाकी है और इसकी अगली सुनवाई 16 नवंबर को तय की गई है।

Sources: Amar Ujala, ETV Bharat, Navbharat Times.

Written by

Akhil Pandey

Akhil Pandey is a Senior Editor responsible for reviewing, refining, and improving editorial content to ensure clarity, accuracy, and readability. His editorial approach focuses…