सरकार और विपक्ष के बीच लोक सभा और परिसीमन विधेयक पर तकरार
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पत्र का जवाब देते हुए संसद के कामकाज में सहयोग की अपील की है, जबकि परिसीमन और सत्र को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

संसदीय कार्य मंत्री का कांग्रेस को जवाब
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पत्र का जवाब देते हुए संसद के सुचारू संचालन में सहयोग मांगा है। खड़गे ने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यह मांग की थी कि परिसीमन से जुड़े किसी भी नए संविधान संशोधन विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। अपनी चिट्ठी में खड़गे ने यह भी रेखांकित किया था कि पिछले परिसीमन विधेयक को संसद में अपेक्षित दो-तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं हुआ था, इसलिए बड़े बदलावों से पहले व्यापक चर्चा आवश्यक है।
सत्र के औपचारिक समापन और नियमों पर चर्चा
अपने पत्र में खड़गे ने मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के 64 दिन बाद भी दोनों सदनों के सत्र के औपचारिक रूप से समाप्त न किए जाने पर भी सवाल उठाया था। इसके उत्तर में मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान में ऐसा कोई प्रावधान या निश्चित समयसीमा नहीं है जिसके तहत सत्र को तुरंत औपचारिक रूप से समाप्त करना अनिवार्य हो। उन्होंने अतीत के कई उदाहरण देते हुए बताया कि पूर्व के वर्षों में भी संसद की बैठकों और सत्रों के बीच लंबा अंतराल देखा गया है, जिसे नियमों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
परिसीमन विधेयक और राजनीतिक दलों की भूमिका
परिसीमन संशोधन विधेयक के संदर्भ में सरकार का पक्ष रखते हुए रिजिजू ने बताया कि इस विषय पर कांग्रेस का समर्थन पाने के लिए पहले भी कई बार पत्राचार किया जा चुका है। सरकार के अनुसार इस साल मार्च और अप्रैल के दौरान पत्र भेजे गए थे और मानसून सत्र के दौरान भी चर्चा की गई थी। हालांकि, सरकार का आरोप है कि कांग्रेस की ओर से कोई निश्चित तारीख नहीं मिलने के बाद अन्य राजनीतिक दलों जैसे कि डीएमके, समाजवादी पार्टी, वाईएसआर कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना (यूबीटी), एआईएमआईएम और बीजेडी के साथ संपर्क साधा गया ताकि लोक सभा और समग्र विधायी कार्यों में आम सहमति बनाई जा सके।



