सुप्रीम कोर्ट में लखीमपुर हिंसा और प्रशांत भूषण की दलीलें
सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के आरोपी आशीष मिश्रा को दिवाली पर घर जाने की अनुमति दी है, जहां सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने न्यायाधीश के तबादले का मुद्दा उठाया।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश और लखीमपुर हिंसा केस
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2021 के किसान आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले में आरोपी आशीष मिश्रा को बड़ी राहत दी है। अदालत ने आशीष मिश्रा को दिवाली के अवसर पर अपने परिवार और करीबियों के साथ समय बिताने के लिए गृहनगर लखीमपुर खीरी जाने की छूट दे दी है। हालांकि, यह अनुमति तय शर्तों के अधीन है और उन्हें 16 नवंबर तक वापस लौटना होगा।
अदालत में प्रशांत भूषण की दलीलें और जज का तबादला
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने अदालत में महत्वपूर्ण बिंदु रखे। उनके मुताबिक, इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश का तबादला किया जाना एक सकारात्मक कदम है। इससे पहले, उन्होंने निचली अदालत के जज के कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि एक चश्मदीद गवाह द्वारा बीमारी का प्रमाण पत्र सौंपे जाने के बावजूद उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था, जिससे निष्पक्ष न्याय पर सवाल खड़े होते हैं। इन आपत्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय से सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट मांगी थी, जिसके बाद संबंधित जज का ट्रांसफर कर दिया गया। वहीं, दूसरी तरफ आशीष मिश्रा के वकील ने इस ट्रांसफर को एक सामान्य प्रक्रिया बताया है।
गवाहों की मौजूदा स्थिति
उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायालय को जानकारी दी है कि इस आपराधिक मुकदमे में कुल 131 गवाह हैं। सरकारी पक्ष के अनुसार, इनमें से अब तक 90 गवाहों के बयान सफलतापूर्व दर्ज किए जा चुके हैं। वर्तमान में आशीष मिश्रा जमानत पर बाहर हैं, लेकिन उन्हें अपने गृहनगर जाने की पाबंदी का सामना करना पड़ रहा था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से सीमित अवधि के लिए हटा दिया गया है।
Sources: AajTak, Dainik Bhaskar, News18 Hindi.



