Thursday, 5 November 2026

ऊना के किसान बिना जुताई और सिंचाई के पराली से उगा रहे हैं आलू

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में किसानों ने धान की कटाई के बाद बिना जुताई और सिंचाई के आलू उगाने की नई तकनीक अपनाई है।

ऊना के किसान बिना जुताई और सिंचाई के पराली से उगा रहे हैं आलू

बिना जुताई और सिंचाई के आलू उगाने की नई पहल

हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना में कृषि क्षेत्र से जुड़े लोग पारंपरिक तौर-तरीकों में बदलाव ला रहे हैं। धान की कटाई के बाद खेतों को खाली छोड़ने और अगली बुवाई के लिए जुताई तथा सिंचाई पर पैसे खर्च करने के बजाय, किसान अब एक नई और अनूठी विधि का उपयोग कर रहे हैं। इस तकनीक के तहत धान की फसल काटने के तुरंत बाद खेत में बची हुई नमी का लाभ उठाया जाता है और मिट्टी पलटने के बजाय सीधे बुवाई की जाती है।

पराली का मल्च के रूप में प्रभावी उपयोग

इस आधुनिक खेती की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें धान के बचे हुए अवशेषों यानी पराली को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाता। पराली को खेत में मल्च के रूप में बिछाया जाता है, जिससे जमीन के अंदर की नमी सुरक्षित बनी रहती है। कृषि अनुसंधान उपकेंद्र अखरोट के मार्गदर्शन में नंदपुर की रहने वाली रंजना देवी ने इस शून्य जुताई विधि को अपने खेत में सफलतापूर्वक लागू किया है। वह क्षेत्र के अन्य किसानों को भी इस प्रक्रिया का प्रशिक्षण दे रही हैं ताकि अधिक से अधिक लोग इससे लाभान्वित हो सकें।

लागत में कमी और जल संरक्षण के फायदे

पारंपरिक कृषि प्रणाली की तुलना में इस शून्य जुताई तकनीक के कई स्पष्ट लाभ सामने आए हैं:

  • धान की कटाई और अगली फसल के बीच खेत को खाली रखने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
  • जुताई और सिंचाई पर होने वाले भारी खर्च में उल्लेखनीय कमी आती है।
  • किसानों को पराली जलाने या उसके कठिन निपटान से मुक्ति मिलती है।
  • मिट्टी का स्वास्थ्य और उसकी प्राकृतिक संरचना बेहतर बनी रहती है।

भविष्य की संभावनाएं

कृषि अनुसंधान उपकेंद्र अखरोट इस जलवायु अनुकूल और जल संरक्षण आधारित पद्धति का लगातार प्रचार-प्रसार कर रहा है। यदि आगामी समय में भी इस विधि के परिणाम इसी तरह सकारात्मक रहे, तो यह मॉडल किसानों के लिए संसाधनों की बचत करने और कम खर्च में बेहतर फसल प्राप्त करने का एक मजबूत माध्यम बन सकता है।

Sources: Jagran, News18 Hindi, NDTV India.

Frequently asked questions

ऊना में आलू की खेती किस नई तकनीक से की जा रही है?
ऊना में किसान धान की कटाई के बाद बिना जुताई और सिंचाई के, पराली को मल्च के रूप में उपयोग करके शून्य जुताई विधि से आलू उगा रहे हैं।
इस तकनीक में खेत की जुताई क्यों नहीं करनी पड़ती?
इस विधि में धान की कटाई के तुरंत बाद खेत में पहले से मौजूद अवशिष्ट नमी का इस्तेमाल किया जाता है और पराली से ढककर नमी को संरक्षित रखा जाता है।
इस शून्य जुताई विधि के क्या लाभ हैं?
इससे जुताई और सिंचाई का खर्च कम होता है, पराली जलाने की समस्या से राहत मिलती है, जल संरक्षण होता है और किसानों को कम लागत में अतिरिक्त आमदनी का विकल्प मिलता है।
किस संस्थान द्वारा इस तकनीक का प्रसार किया जा रहा है?
कृषि अनुसंधान उपकेंद्र अखरोट की ओर से किसानों के खेतों में इस तकनीक का प्रदर्शन और प्रसार किया जा रहा है।
Written by

Tanya Singh

Tanya Singh is a Junior Bengali Content Writer who specializes in creating engaging, informative, and reader-friendly content in Bengali. She focuses on presenting information in…