ऊना के किसान बिना जुताई और सिंचाई के पराली से उगा रहे हैं आलू
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में किसानों ने धान की कटाई के बाद बिना जुताई और सिंचाई के आलू उगाने की नई तकनीक अपनाई है।

बिना जुताई और सिंचाई के आलू उगाने की नई पहल
हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना में कृषि क्षेत्र से जुड़े लोग पारंपरिक तौर-तरीकों में बदलाव ला रहे हैं। धान की कटाई के बाद खेतों को खाली छोड़ने और अगली बुवाई के लिए जुताई तथा सिंचाई पर पैसे खर्च करने के बजाय, किसान अब एक नई और अनूठी विधि का उपयोग कर रहे हैं। इस तकनीक के तहत धान की फसल काटने के तुरंत बाद खेत में बची हुई नमी का लाभ उठाया जाता है और मिट्टी पलटने के बजाय सीधे बुवाई की जाती है।
पराली का मल्च के रूप में प्रभावी उपयोग
इस आधुनिक खेती की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें धान के बचे हुए अवशेषों यानी पराली को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाता। पराली को खेत में मल्च के रूप में बिछाया जाता है, जिससे जमीन के अंदर की नमी सुरक्षित बनी रहती है। कृषि अनुसंधान उपकेंद्र अखरोट के मार्गदर्शन में नंदपुर की रहने वाली रंजना देवी ने इस शून्य जुताई विधि को अपने खेत में सफलतापूर्वक लागू किया है। वह क्षेत्र के अन्य किसानों को भी इस प्रक्रिया का प्रशिक्षण दे रही हैं ताकि अधिक से अधिक लोग इससे लाभान्वित हो सकें।
लागत में कमी और जल संरक्षण के फायदे
पारंपरिक कृषि प्रणाली की तुलना में इस शून्य जुताई तकनीक के कई स्पष्ट लाभ सामने आए हैं:
- धान की कटाई और अगली फसल के बीच खेत को खाली रखने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
- जुताई और सिंचाई पर होने वाले भारी खर्च में उल्लेखनीय कमी आती है।
- किसानों को पराली जलाने या उसके कठिन निपटान से मुक्ति मिलती है।
- मिट्टी का स्वास्थ्य और उसकी प्राकृतिक संरचना बेहतर बनी रहती है।
भविष्य की संभावनाएं
कृषि अनुसंधान उपकेंद्र अखरोट इस जलवायु अनुकूल और जल संरक्षण आधारित पद्धति का लगातार प्रचार-प्रसार कर रहा है। यदि आगामी समय में भी इस विधि के परिणाम इसी तरह सकारात्मक रहे, तो यह मॉडल किसानों के लिए संसाधनों की बचत करने और कम खर्च में बेहतर फसल प्राप्त करने का एक मजबूत माध्यम बन सकता है।
Sources: Jagran, News18 Hindi, NDTV India.



