अशोक लवासा ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने एक नागरिक सम्मेलन के दौरान वोटर लिस्ट से नागरिकों के नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि मतदाताओं के नाम किसी ठोस सबूत के बिना, केवल इस संदेह पर सूची से बाहर कर दिए गए कि वे देश के नागरिक नहीं हैं।
वोटर हटाने की प्रक्रिया और ERO की भूमिका
ऑनलाइन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लवासा ने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार केवल निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) के पास ही मतदाता सूची से नाम हटाने का अधिकार होता है। हालांकि, उन्हें उस केंद्रीय रूप से नियंत्रित सिस्टम तक पहुंच से वंचित रखा गया, जिसे अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल किया जाना था। उन्होंने इस पूरी कार्यप्रणाली को गैर-कानूनी करार दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग की प्राथमिकता अब उन मतदाताओं को हटाने पर केंद्रित हो गई है जिन्हें वह अयोग्य मानता है। इतिहास में कभी भी मतदाता इतने अधिक चिंतित और परेशान नहीं रहे थे कि उनका नाम सूची में सुरक्षित रहेगा या नहीं।
प्रकाश राज और अन्य वक्ताओं के विचार
इस सम्मेलन में अभिनेता और फिल्म निर्माता प्रकाश राज ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि डेटा का केंद्रीकरण किया गया है और माइनॉरिटी वोटों को हटाने के लिए फॉर्म 7 का उपयोग किया गया है। इसके अलावा, इस ऑनलाइन आयोजन में जवाहर सरकार, विकास रंजन भट्टाचार्य और अनीता अग्निहोत्री जैसे अन्य प्रतिष्ठित वक्ता भी शामिल हुए, जिन्होंने मौजूदा व्यवस्था पर चर्चा की।
Sources: Jagran, ABP News, Dainik Bhaskar.




