बांग्लादेश को लेकर छिड़ी बहस पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर का बयान सामने आया
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हालिया राजनीतिक बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि भारत की तुलना किसी अन्य देश से करना सही नहीं है।

राजनीतिक बहसों के बीच बांग्लादेश का जिक्र
हाल ही में राजनीतिक हलकों में विरोध प्रदर्शनों और रिजीम चेंज जैसे शब्दों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों के आंदोलनों और बयानों के बीच बांग्लादेश और फ्रांस जैसी जगहों पर हुई घटनाओं का संदर्भ दिया जा रहा है, जिसपर अब बड़े नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
शशि थरूर की दो टूक: भारत की तुलना किसी से नहीं
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने स्पष्ट किया है कि रिजीम चेंज जैसे शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का कोई तुक नहीं बनता है। उन्होंने कहा कि भारत न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस, इसलिए इस तरह की तुलना करना बिल्कुल ठीक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वे फ्रांस जैसी हिंसा या आगजनी का समर्थन नहीं करते और केवल शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों में विश्वास रखते हैं। थरूर के मुताबिक, उनकी मुख्य मांग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
बीबीसी रिपोर्ट्स और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का पक्ष
दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मामले पर आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि पड़ोसी देश बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाओं और फ्रांस के दंगों जैसी ही साजिश भारत के लिए भी रची गई थी। उनका आरोप है कि कुछ भारत-विरोधी गिरोहों और राजनेताओं ने मिलकर युवाओं को भड़काने और सड़कों पर हिंसा फैलाने की योजना बनाई थी। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसी साजिश रचने वाले यह भूल जाते हैं कि भारत में सत्ता परिवर्तन केवल और केवल चुनावों के माध्यम से ही हो सकता है। इस पूरे घटनाक्रम पर मीडिया और दिल्ली हाईकोर्ट का याचिका पर बड़ा फैसला, वोटर लिस्ट में नाम के लिए भरें फॉर्म-6 जैसे मामलों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।
लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा
विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे केवल संवैधानिक मुद्दों और लोकतांत्रिक अधिकारों के संरक्षण के लिए आवाज उठा रहे हैं। सरकार को गिराने जैसी किसी भी कोशिश से उनका कोई लेना-देना नहीं है। देश के नागरिक होने के नाते हर किसी को अपने लोकतंत्र की रक्षा करने का पूरा अधिकार है, और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं को भी संविधान के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
Sources: ABP News, BBC, Dainik Bhaskar, News18 Hindi.



