उत्तर प्रदेश के बिजनौर में भाईचारे की अनोखी मिसाल
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के मोहड़ा गांव में एक बुजुर्ग मुस्लिम महिला के निधन के बाद स्थानीय लोगों ने आपसी सहमति से राम लीला का मंचन टालने का फैसला किया। लगभग 85 वर्षीय गफूरन का 10 अक्टूबर को निधन हो गया था, जिसके चलते उसी दिन रात को शुरू होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया।
आयोजकों का कहना था कि गांव की एक सम्मानित महिला का जनाजा घर में रखा हो और ऐसे समय में मनोरंजन करना सही नहीं लगा। इस फैसले से पूरे इलाके में आपसी सौहार्द और भाईचारे की चर्चा होने लगी।
गफूरन के निधन और राम लीला पर प्रभाव
ग्राम पंचायत मोहड़ा में चौहान समाज बहुसंख्यक है, जबकि वहां मुस्लिम और अन्य वर्गों के लोग भी निवास करते हैं। इसी गांव में हर साल नवरात्र के पहले दिन से राम लीला का मंचन शुरू होता है। तय कार्यक्रम के अनुसार 10 अक्टूबर की रात आठ बजे से मंचन होना था, लेकिन शाम को लगभग पांच बजे गफूरन का शव गांव पहुंचने पर माहौल गमगीन हो गया।
आदर्श राम लीला कमेटी के संरक्षक और ग्राम प्रधान ऋषिपाल सिंह ने बताया कि गफूरन गांव की बेटी और बुआ के समान थीं। उनके निधन के बाद समिति से जुड़े सभी सदस्यों ने मिलकर यह निर्णय लिया कि उस दिन का आयोजन आगे न बढ़ाया जाए।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया और आपसी सौहार्द
स्थानीय लोगों के अनुसार मोहड़ा गांव में सांप्रदायिक तनाव का कोई इतिहास नहीं रहा है। यहां के निवासी मिलजुलकर सभी उत्सवों में हिस्सा लेते हैं। गफूरन के बड़े बेटे जाकिर हुसैन ने बताया कि उनकी मां हमेशा पूरे परिवार और गांव को जोड़कर रखती थीं। गांव वालों का यह कदम आपसी प्रेम और सम्मान का प्रतीक बन गया है, जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर भी की जा रही है।
Sources: BBC, AajTak, गुड न्यूज़ टुडे.




