Sunday, 18 October 2026

गोपाल शंकरनारायणन ने जंतर-मंतर केस से खुद को अलग किया, सुप्रीम कोर्ट में हुई बहस

सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान वकील गोपाल शंकरनारायणन और बेंच के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों से हटने का फैसला किया।

गोपाल शंकरनारायणन ने जंतर-मंतर केस से खुद को अलग किया, सुप्रीम कोर्ट में हुई बहस

गोपाल शंकरनारायणन ने दिल्ली विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों से बनाई दूरी

सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में हुई एक सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन और बेंच के बीच तीखी नोकझोक देखने को मिली। इस घटनाक्रम के बाद उन्होंने दिल्ली विरोध प्रदर्शनों से जुड़े सभी सात मामलों से खुद को अलग कर लिया है, जिनमें वे बतौर वकील पेश हो रहे थे।

महुआ मोइत्रा के केस में सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस

यह पूरा घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वकील गोपाल शंकरनारायणन के बीच गरमागरम बहस हुई। वकील ने आरोप लगाया था कि दिल्ली विरोध प्रदर्शन से संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच कोर्टरूम को नियंत्रित करने में नाकाम रही है।

बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस बागची ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि वकील खुद कोर्ट में वही कर रहे हैं जो उन्हें नापसंद है। जज ने उनसे थोड़ा धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि यदि वे खुद लगाम अपने हाथ में ले लेंगे तो अदालत कार्यवाही को कैसे नियंत्रित कर पाएगी। यह टिप्पणी शंकरनारायणन और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के बीच हुई बहस के बाद सामने आई थी।

सर्किट हाउस और अन्य मामलों पर अदालत का रुख

इसी बीच, महुआ मोइत्रा को कथित तौर पर कृष्णानगर सर्किट हाउस से निकाले जाने के मामले पर भी सुनवाई हुई। सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सर्किट हाउस से हटाए जाने की बात को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वहां मरम्मत का कार्य चल रहा था, इसलिए उन्हें रहने के लिए दूसरी सरकारी जगह का प्रस्ताव दिया गया था।

मामले की सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस प्रकार के विवाद सामान्यतः सुप्रीम कोर्ट तक नहीं आने चाहिए। अदालत ने सुझाव दिया कि कई दिन पहले नोटिस भेजने की अनिवार्यता के स्थान पर पहले से सूचना देने का कोई अन्य व्यावहारिक तरीका अपनाया जाना चाहिए, साथ ही सरकारी आवास आवंटन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने का सुझाव भी दिया गया।

Sources: Hindustan, Navbharat Times, Hindustan.

Frequently asked questions

गोपाल शंकरनारायणन ने किन मामलों से खुद को अलग किया?
उन्होंने दिल्ली विरोध प्रदर्शनों से जुड़े उन सभी सात मामलों से खुद को अलग कर लिया जिनमें वे पेश हो रहे थे।
मामले से हटने का क्या कारण बताया गया?
उन्होंने कारण बताया कि बेंच कार्यवाही को नियंत्रित करने में विफल रही थी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वकील गोपाल शंकरनारायणन के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
महुआ मोइत्रा के सर्किट हाउस विवाद पर सरकार का क्या पक्ष था?
सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने महुआ मोइत्रा को सर्किट हाउस से निकाले जाने की बात को नकारा और बताया कि वहां मरम्मत का काम चल रहा था।
Written by

Akhil Pandey

Akhil Pandey is a Senior Editor responsible for reviewing, refining, and improving editorial content to ensure clarity, accuracy, and readability. His editorial approach focuses…