केंद्र सरकार का बड़ा फैसला और नई टैक्स दरें
केंद्र सरकार ने देर रात पेट्रोल और डीजल के निर्यात को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स को बढ़ाकर 2.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में भारी कटौती की गई है। रॉयटर्स के मुताबिक ये नई दरें 16 अक्टूबर 2026 से लागू हो चुकी हैं।
दूसरी ओर, डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क को 16 रुपये से घटाकर 8.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। हालांकि, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है।
घरेलू बाजार और कीमतों पर असर
इस टैक्स बदलाव का सीधा असर देश के आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ेगा। सरकार ने घरेलू खपत के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले ईंधन पर लागू मौजूदा शुल्क में कोई फेरबदल नहीं किया है। केवल निर्यात टैक्स में हुए बदलाव के आधार पर यह अनुमान लगाना सही नहीं होगा कि आम जनता के लिए ईंधन के दाम घटेंगे या बढ़ेंगे।
विंडफॉल टैक्स के नियमों के बदलाव के बाद शुक्रवार सुबह सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों जैसे HPCL, IOCL और BPCL ने अपनी दरें जारी कीं। इसके मुताबिक दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये और डीजल की कीमत 95.20 रुपये पर स्थिर बनी हुई है, यानी दरों में कोई फेरबदल दर्ज नहीं किया गया है।
विंडफॉल टैक्स की समीक्षा और पृष्ठभूमि
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्यों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर नजर रखते हुए सरकार हर 15 दिन में विंडफॉल टैक्स के दरों की समीक्षा करती है। इस प्रकार के कर को लगाने का मुख्य उद्देश्य ईंधन के निर्यात और देश के भीतर उसकी उपलब्धता के बीच संतुलन कायम रखना है।
गौरलतब है कि भारत ने सबसे पहले जुलाई 2022 में ईंधन के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाया था और लगभग दो साल बाद इसे वापस ले लिया था। इसके पश्चात, ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध के दौरान कच्चे तेल के दामों में आए उछाल को देखते हुए सरकार ने मार्च 2026 में इस अप्रत्याशित कर को दोबारा से लागू किया था।
Sources: Hindustan, Jagran, Amar Ujala.




