प्रशांत किशोर का न्यायपालिका और व्यवस्था पर बयान
जन सुराज के संस्थापक और बांकीपुर से विधायक प्रशांत किशोर ने हाल ही में न्यायपालिका की कार्यप्रणाली और चुनावी व्यवस्था पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पटना के बिहटा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब जनता को अपने अधिकारों के हनन का अहसास होता है, तब वे सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होती है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और प्रतिक्रिया
बीते गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी कि अदालत को कोई धमका नहीं सकता है। इस पर अपनी बात रखते हुए प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि जब बिहार में चुनाव आयोग द्वारा कथित तौर पर धांधली करते हुए दस हजार रुपये में वोट खरीदे जाने की बात सामने आई, तब न्यायालय ने इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं किया। हालांकि, जब सड़क पर इतने ही लोग प्रदर्शन करते हैं, तब इस पर ध्यान दिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के हालात लोकतंत्र के लिए एक गंभीर संकट का रूप लेते जा रहे हैं।
एमएलसी चुनाव और स्थानीय मुद्दे
बिहटा में आयोजित सभा का मुख्य उद्देश्य पटना स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करना था। प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि इन चुनावों का मकसद सरकार बनाना या गिराना नहीं है, बल्कि मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाना है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग सोच-समझकर करें ताकि जनप्रतिनिधियों पर क्षेत्र के विकास और बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार सुनिश्चित करने का दबाव बना रहे।
आगे की स्थिति
विपक्ष और विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। इस संबंध में दिल्ली में इंडिया गठबंधन की ओर से मार्च भी निकाला गया था और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
Sources: ABP News, Dainik Bhaskar, Hindustan.




