सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद येस बैंक के शेयरों में भारी गिरावट
देश के पांचवें सबसे बड़े प्राइवेट बैंक माने जाने वाले येस बैंक को सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले के बाद झटका लगा है, जिसके कारण इसके शेयरों में 14% तक की भारी गिरावट देखने को मिली है। यह पूरा मामला 8,415 करोड़ रुपए के एडिशनल टियर-1 बॉन्ड्स से जुड़ा हुआ है, जिसमें आम और बड़े निवेशकों ने पैसा लगाया था।
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साल 2020 का संकट और आरबीआई की कार्रवाई
मार्च 2020 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने येस बैंक का बोर्ड भंग कर दिया था और ग्राहकों की निकासी पर 50,000 रुपए की सीमा तय कर दी थी। उस दौरान एटीएम के बाहर लंबी कतारें लग गई थीं और बैंक को 18,564 करोड़ रुपए का भारी घाटा हुआ था, जो उस समय भारतीय बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा घाटा था। बाद में एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, एक्सिस और कोटक जैसे बैंकों ने मिलकर वित्तीय सहायता प्रदान की थी।
संस्थापक राणा कपूर की नीतियां और एनपीए की समस्या
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक की इस स्थिति के पीछे फाउंडर राणा कपूर की नीतियां थीं, जिन्होंने कर्ज में डूबी कंपनियों को बड़े पैमाने पर लोन बांटे। ये लोन बाद में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (NPA) बन गए और बैंक के बही-खातों में इन गड़बड़ियों को छिपाने की कोशिश की गई। इसके चलते 2018 में राणा कपूर का कार्यकाल बढ़ाने से इनकार कर दिया गया और बैंक का शेयर भारी गिरावट का शिकार हो गया।
येस बैंक की वित्तीय स्थिति और वापसी
आरबीआई के बचाव अभियान और नए प्रबंधन के आने के बाद बैंक ने धीरे-धीरे रिकवरी की है। जापानी कंपनी SMBC, एलआईसी और एसबीआई के समर्थन से बैंक अब मुनाफे में लौट आया है। बैंक की कुल संपत्ति बढ़कर 4.69 लाख करोड़ रुपए हो चुकी है और शाखाओं का विस्तार करने की भी योजना है। हालांकि, मौजूदा कानूनी और अदालती फैसलों का बैंक पर क्या असर होगा, इस पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।
Sources: Jagran, Hindustan, ThePrint Hindi.




