संजय राउत और निखिल वागले को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
देश की सर्वोच्च अदालत ने शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले के खिलाफ औपचारिक रूप से नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की तरफ से दाखिल की गई याचिका के आधार पर की गई है। मुख्य न्यायाधीश के बारे में की गई कुछ ऑनलाइन टिप्पणियों के बाद अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी से मुकदमा चलाने की सहमति मांगी गई थी, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल दोनों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने से छूट दी गई है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी और स्पष्टीकरण की मांग
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायपालिका पर किए गए हमलों को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि अदालत ने हमेशा नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने की दिशा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और उम्मीद जताई है कि लोग सूझबूझ से काम लेंगे। इसके अलावा, अदालत ने इस बात की तरफ भी इशारा किया कि इस याचिका के एक पक्षकार को अपने आचरण के संबंध में स्पष्टीकरण देना होगा।
विवाद का मुख्य कारण
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मुख्य न्यायाधीश की ओर से कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेताओं को मुलाकात का समय नहीं मिल पाया था। इस बात से नाखुश होकर संजय राउत और निखिल वागले ने सोशल मीडिया पर तीखे और विवादित ट्वीट किए थे। राउत ने अपनी टिप्पणियों में आरोप लगाया था कि जज राजनीतिक नेताओं की पार्टियों में शामिल होते हैं और उनके साथ बैडमिंटन खेलते हैं।
संजय राउत की प्रतिक्रिया और माफी का बयान
पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वे देश की संवैधानिक संस्थाओं का पूरा सम्मान करते हैं और यदि उनकी किसी बात से ठेस पहुंची है तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगने में कोई आपत्ति नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग और अन्य लंबित मामलों में न्याय की गुहार लगाते हुए यह भी कहा कि वे पिछले कई वर्षों से अपनी पार्टी और चुनाव चिह्न की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक न्याय नहीं मिल पाया है।
Sources: ABP News, Jagran, Dainik Bhaskar.




