Sunday, 18 October 2026

विराट कोहली के शतक और अंपायर के फैसले पर मचा सियासी विवाद

अभिजीत दीपके के पुराने बयानों के आधार पर विराट कोहली के 48वें शतक के दौरान आए एक अंपायर के फैसले को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।

विराट कोहली के शतक और अंपायर के फैसले पर मचा सियासी विवाद

विराट कोहली के शतक पर क्यों छिड़ी है नई बहस?

हाल ही में सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के कुछ पुराने बयान काफी वायरल हो रहे हैं। इन बयानों में उन्होंने भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली के 48वें वनडे शतक के दौरान मैदान पर आए एक फैसले की तीखी आलोचना की है। आलोचकों और राजनीतिक विरोधियों द्वारा इन पुराने बयानों को साझा किए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।

अभिजीत दीपके के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट और अंपायर का फैसला

वायरल हो रही पोस्ट्स के मुताबिक, दीपके ने आपत्ति जताई थी कि एक मैच के दौरान अंपायर ने साफ़ तौर पर वाइड जा रही गेंद को वाइड करार नहीं दिया ताकि खिलाड़ी अपना व्यक्तिगत मुकाम हासिल कर सके। अपने बयानों में उन्होंने तर्क दिया था कि नियमों का पालन होना चाहिए और किसी भी खिलाड़ी के व्यक्तिगत मील के पत्थर के लिए अंपायर को नियमों में कोई छूट नहीं देनी चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) को लेकर भी अपनी नाराजगी व्यक्त की थी।

मैच की पूरी कहानी और वह ऐतिहासिक पल

यह पूरा मामला उस मुकाबले से जुड़ा है जिसमें बांग्लादेश ने भारत के सामने 257 रनों का लक्ष्य रखा था। भारतीय टीम की शुरुआत शानदार रही और जब पारी अपने अंतिम चरण में थी, तब विराट कोहली अपने शतक के बेहद करीब पहुंच गए थे। जीत और शतक दोनों के लिए ही टीम और बल्लेबाज को समान रनों की दरकार थी।

जब गेंदबाज नसुम अहमद पारी का 42वां ओवर लेकर आए, तो उनकी पहली गेंद लेग साइड की तरफ से गुजरी। उस गेंद को वाइड होना चाहिए था, लेकिन मैदानी अंपायर रिचर्ड केटलरो ने वाइड का इशारा नहीं किया। इसके बाद कोहली ने तीसरी गेंद पर छक्का जड़कर न सिर्फ अपना 48वां शतक पूरा किया, बल्कि भारत को 7 विकेट से शानदार जीत भी दिलाई।

वर्तमान स्थिति और विवाद की पृष्ठभूमि

चूंकि अभिजीत दीपके हाल ही में जंतर-मंतर पर अपने आंदोलन और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर सुर्खियों में आए हैं, इसलिए उनके विरोधी उनके पुराने सोशल मीडिया पोस्ट को निकालकर उन्हें घेरने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि विरोधी टीम या खिलाड़ियों ने उस समय मैच के दौरान इस फैसले का विरोध नहीं किया था, लेकिन दीपके की टिप्पणियों ने खेल भावना और नियमों की पारदर्शिता को लेकर बहस को दोबारा जीवित कर दिया है।

Sources: Hindustan, Navbharat Times, AajTak.

Written by

Priya Sharma

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